हज़रत इमाम ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) हमारे चौथे इमाम

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हज़रत इमाम ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) हमारे चौथे इमाम
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प्रस्तुति प्रतिलेख:

हज़रत इमाम ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) हमारे चौथे इमाम Zainul Abideen हज़रत इमाम ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) हमारे  चौथे इमाम अंग्रेजी : ए एस हाशिम (एम डी) हिंदी अनुवाद : सय्येद जाफर नकवी PROPHET MUHAMMAD (pbuh) II. After Hijrah: In Medina

शहर बानू, पुत्री - यज़'दजिर्द ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen वंशावली अली (अ:स) फातिमा (स:अ) अल-हुसैन (अ:स) ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) शहर बानू, पुत्री - यज़'दजिर्द 

ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) - बचपन में Zainul Abideen ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) - बचपन में माँ बच्चे के जन्म के बाद कुछ दिन मर  जाती है फूफी जैनब (स:अ) उसका ख़याल रखती हैं   दादा अली (अ:स) की तरह आकर्षक रूप है  दादा अली (अ:स) बहुत प्यार करते हैं  जब दो साल के हैं तो दादा अली (अ:स) का क़त्ल  हो गया   मदीने में वापसी

13 साल की ऊमर तक अल-हसन (अ:स) और अल-हुसैन (अ:स) ने पढ़ाया ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen 13 साल  की ऊमर तक  अल-हसन (अ:स) और अल-हुसैन (अ:स) ने पढ़ाया  मस्जिदे-नबवी में आयोजित परिचर्चा में भाग लिया अल-हसन (अ:स) से  गहरे सम्बन्ध  जैनब ( स:अ) से बहुत नज़दीक, जो फूफी थीं सीखने और तर्क की उनकी क्षमता उत्कृष्ट है

ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen अपनी जवानी में 14 साल की ऊमर में अल-हसन (अ:स) को खोया जो मु'आविया के ज़हर से मारे गए औसत कद, पतला, सुन्दर और प्रभावशाली. चरित्र इस्लाम से ढाला गया था अपने पिता के नेतृत्व में चर्चा में भाग लेना 

पूर्व वयस्कता में फातिमा (स:अ) से शादी - अल-हसन (अ:स) की बेटी ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen फातिमा (स:अ) से शादी - अल-हसन (अ:स) की बेटी  शादी के एक साल बाद एक लड़का पैदा हुआ, नाम - मुहम्मद (अल बाक़िर  [अ:स] ) उम्मत परेशानी में थी क्योंकि मु-आविया यज़ीद को ख़लीफा नियुक्त करना चाहता था  कुछ समय के लिए मु'आविया के एजेंट और सहयोगी लोगों के बीच यज़ीद की स्वीकृति और सहयोग को बेचने में लगे थे 

अल-हुसैन (अ:स) के साथ कर्बला ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen अल-हुसैन (अ:स) के साथ कर्बला      ज़ैनुल आबेदीन (अ:स), अपनी पत्नी और अपने सुपुत्र (मुहम्मद अल बाक़िर अ:स) के साथ कर्बला में अल-हुसैन (अ:स) के साथ थे  वोह नबी (स:अ:व) के परिवार पर कर्बला में हुई बर्बरता और के गवाह हैं  अपने पिता, चचा, और बहुत सारे रिश्तेदारों (17 किशोरों) की निर्दयता से हत्या और उनके हाथ और सरों को टुकड़ों में कटते  देखा   जलते हुए खैमे, और उन खैमों से बच्चों की चीखें और डरे एवं भागते हुए बच्चों को आश्रय ढूँढता हुआ देखा  बीमारी और बेहोशी की हालत में दुःस्वप्न देखा 

ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen कर्बला में  वह कर्बला की घटनाओं के दौरान बुखार और बेहोशी के साथ गंभीरता से बीमार हो गए  उनको कर्बला की अशांति के दौरान इमामत का दर्जा मिला  जैनब (स:अ) ने उनको इमाम कहा  कुफा में इब्न-ज़ियाद क़ा सामना कुरान को उद्धृत (कुरान की रोशनी) करते हुए किया  उनको 700 मील दमिश्क (सीरिया) बेड़ी में ले जाया गया  72 सर, पिता के सर समेत, भालों के शीर्ष पर दिखावे के लिए रखे गए 

दमिश्क में दर्शकों ने इनके विद्रोही होने को सोचा ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen दमिश्क में  दर्शकों ने इनके विद्रोही होने को  सोचा  यज़ीद के साथ आमना सामना, जवाब केवल कुरान के सन्दर्भ में दिया, यज़ीद को मात दी  मस्जिदे उमवी में शुक्रवार के नमाज़ में भाषण दिया  अपनी इच्छा के अनुसार परिवार के साथ मदीना वापस आ गए, लेकिन भयानक क्लेश ने कभी उनके मन को नहीं छोड़ा

मस्जिद उमवी में दिए गए खुतबा का कुछ भाग ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen मस्जिद उमवी में दिए गए खुतबा का कुछ भाग   मैं मक्का और मदीना के प्रभु का वंशज हूँ मैं ज़मज़म और सफा के प्रभु का अंग हूँ, मैं उसका नज़दीकी वंशज हूँ जिसके पूर्वज ने अपनी चादर में काला पत्थर उठाया था , मै उसका बेटा हूँ जो बुर्राक पर सवार हुआ और जिसने जन्नत की सैर की  मै उसके वंशज में से हूँ जो सिद्रातुल मुन्तहा तक गया, और अल्लाह ने उसे वही के फव्वारा का स्त्रोत दिखाया था 

ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen खुतबा का अतिरिक्त भाग  मै उस मार्गदर्शक की संतान हूँ, जिससे काफिरों क़ो  सीधे रास्ते का मार्गदर्शन मिल गया, मै ... मै उस इंसान की संतान हूँ जिसके जीवन क़ो क्रूर उँगलियों ने मसल दिया, और मै उस इंसान की संतान हूँ जिसका गला उस समय काटा गया जब वो प्यासा था, और जिसकी लाश क़ो कर्बला की जलती रेत पर छोड़  दिया गया, और मै उस इंसान की संतान हूँ जिसके पिता की शहादत का सोग आसमान में फ़रिश्तों ने और जिन्नों और इंसानों सभी ने किया, और मै उस इंसान की संतान हूँ जिसके पिता का कटा हुआ सर नैज़े (भाले) पर बुलंद किया गया और उसको शहर-शहर दिखाने के लिये घुमाया गया

ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) ने तनहाई अपना ली. Zainul Abideen ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) ने तनहाई  अपना ली. कर्बला के वाक़ये के बाद ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) ने मदीना के बाहर एक तम्बू में एक साल तक तन्हाई अपना ली ईस दौरान जनाब ज़ैनब (स:अ) ने रोज़ाना उनका ख़्याल रखा सिर्फ़ पांच लोगों क़ो  उनसे मिलने की इजाज़त थी चचा मोहम्मद इब्ने अल-हनफ़िया ने उनका प्रतिनिधित्व किया और उनकी और से कार्य करते थे अपना सारा समय दुआ लिखने, सोचने और नमाज़ में बिताते थे गुप्त एजेंटों और जासूसों से दूर रहते थे

उन्होंने भविष्य इस्लामी कार्यों के लिए रास्ता बनाया ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen उन्होंने भविष्य इस्लामी कार्यों के लिए रास्ता बनाया तीन चैनल : इस्लामीक विद्वानों की उपज जो बनी-उम्मैय्या के तख़्त क़ो उलट दे (ईस्लामिक विद्वान) संचार के साधन - विद्वानों के विभिन्न काडर द्वारा शिक्षाओं का प्रसार पारदर्शी नेटवर्क की स्थापना - अहलेबैत (अ:स) को बढ़ावा देने के लिए ऊपर लिखी हुई बातों क़ो हर एक साल  पारदर्शी तरीक़े से लगातार किया जाता है!

उनकी तत्काल अवधि महत्वपूर्ण तत्काल रणनीति : ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen उनकी तत्काल अवधि महत्वपूर्ण तत्काल रणनीति : रोना और सक्रिय रूप से अल-हुसैन (अ:स) के लिये लोगों से सहानुभूति की मांग, और लगातार कर्बला की बात करना नमाज़  और देर तक सजदा करने पर ज़ोर देना दुआओं पर/क़ो क़ायम रहना/करना और उनको लिखना ताकि वो भविष्य के अभियान का नक़शा बन जाएँ राजनीति  का त्याग ईमाम हुसैन (अ:स) की मजलिस क़ो हर साल क़ायम करना धीरे - धीरे इस्लाम के विद्वानों को शिक्षित करना

ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen बनू उमय्या क़ो शरण देना मरवान और उसके परिवार एवं रिश्तेदार, 400 लोगों का मुफ़्त में स्वागत सत्कार करना. इनको कुछ हफ़्तों तक रखना, उस वक़्त जब यज़ीद की सेना ने मदीना पर चढ़ाई की उस्मान के हुकूमत के वक़्त मरवान सब से बड़ा दुश्मन और परेशानी का कारण था मरवान अहलेबैत (अ:स) का दुश्मन था, मगर अभी उसे इनके मदद की ज़रुरत थी जंगे जमाल में मरवान हज़रत अली (अ:स) से लड़ा था

ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen समय की अशांति ज़ैनुल आबेदीन विफल मदीना विद्रोह के गंभीर परिणाम के गवाह हैं: सहाबा शहीद किये गए, बीवियों पर हमला किया गया, और संपत्ति लूटी गयी इब्ने ज़ुबैर क़ो शांत करने के लोए काबा पर हमला किया गया अल-हज्जाज ने काबा पर आग के शोले फेक कर उसे जलाया 33 वर्ष की उम्र में यज़ीद मर गया सेना  ने मक्का छोड़ा

यज़ीद के 3 साल की हुकूमत के दौरान Zainul Abideen ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) यज़ीद के 3 साल की हुकूमत के दौरान 2. मदीना पर चढ़ाई 3. काबा पर हमला 1. कर्बला में अत्याचार व नरसंहार यज़ीद की हुकूमत के अत्याचार

ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen और अधिक बग़ावत बनू उमय्या के खिलाफ़ तव्वाबून की बग़ावत - मरते दम तक लड़ो ईराक़ में मुख़तार की बग़ावत : ईराक़ फ़तह, हुसैन के सभी दुश्मनों का पीछा और उनका क़त्ल, जिसमें इब्ने ज़्याद, शिमर, और ओमर इब्ने सा'अद भी थे मरवान का ख़लीफा बन जाना और 9 महीने के बाद मृत्यु ऐसा कहा जाता है की मरवान अपनी पत्नी के हाथों या तो ज़हर से मरा या उसका गला घोंट कर मार दिया

मुश्किल समय ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen अल-हज्जाज (जिसने इब्ने ज़्याद क़ो दबाने के लिये काबा जलाया था) ईराक़ का गवर्नर बना, ईराक़ में 20 साल तक अत्याचारी शासन. नया तानाशाह के अत्याचार की कोई सीमा नहीं अब्दुल मलिक (मरवान का बेटा) सीरिया (शाम) का ख़लीफ़ा बना ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) का लगन से काम करते रहना और लोगों की भलाई और अच्छाई पर ध्यान केंद्रित करते हुए समाज क़ो मज़बूत आधार प्रदान करना.

इस्लामी संस्थान 27 साल की अवधि में इस्लामी संस्थान का स्थिर विकास ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen इस्लामी संस्थान 27 साल की अवधि में इस्लामी संस्थान का स्थिर विकास विद्वानों की पढ़ाने में लगातार मेहनत. विकास स्थिर लेकिन तेजी से बढ़ता हुआ बेटा अल-बाक़िर (अ:स) और उनके पोते अल-सादीक़ (अ:स) भी प्रवचन और चर्चाओं में शामिल आख़िर में, 160 ईस्लामिक विद्वान बने

उनका सिखाना और चर्चाएँ तफ़सीर, हदीस, अहकाम, और धर्मशास्र और न्यायशास्र ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen उनका सिखाना और चर्चाएँ तफ़सीर, हदीस, अहकाम, और धर्मशास्र और न्यायशास्र उन्होंने अल-सहीफ़ा अल-सज्जादिया लिखा उन्होंने रिसालह अल-हुक़ुक़ लिखा (हमारे जीवन में व्यक्तिगत अधिकार बनाम व्यक्तिगत ज़िम्मेदारियाँ)

किये गए कार्यों में शामिल था: ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen इस्लाम के  3 चरण चरण द्वारा किए गए : किये गए कार्यों में शामिल था: चरण I   मोहम्मद (स:अ:व:व) गहराई में इस्लाम शिक्षण पर ज़ोर था, ख़ासकर सहाबा के लिये (जो साथ रहते थे), और इस्लाम क़ो आम लोगों तक ज़्यादा से ज़्यादा पहुंचाना, ईस बात क़ो ध्यान में रखते हुए की आम जनता इस्लाम समझने में ज़्यादा समय लेगी, इसी कारण मोहम्मद (स:अ:व:व) ने पाखंडियों से लड़ाई नहीं की.

इस्लाम के 3 चरण अली (अ:स) , अल-हसन (अ:स) , अल-हुसैन (अ:स) चरण II चरण ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen इस्लाम के  3 चरण चरण द्वारा किए गए :: किये गए कार्यों में शामिल था: चरण II   अली (अ:स) , अल-हसन (अ:स) , अल-हुसैन (अ:स) यह वो 3 लोग थे जो लगातार सामना कर रहे थे इस्लामिक कमज़ोर व्यक्ति द्वारा नकारात्मक शक्तियों का, जो इस्लाम क़ो कमज़ोर करने की सबसे बड़ी धमकी थी,: चाहे वो अली (अ:स) की ख़िलाफत का दौर हो, अल-हसन की शांतिपूर्वक सुलह की स्वीकृति हो, या कर्बला की विस्फोटक घटना जिसका यक़ीन था वो हो जो अल-हुसैन के साथ घटी

इस्लाम के 3 चरण ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) और उनके बाद के ईमाम. चरण III चरण Zainul Abideen इस्लाम के  3 चरण चरण द्वारा किए गए :: किये गए कार्यों में शामिल था: चरण III   ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) और उनके बाद के ईमाम. जब  टकराव और विरोध का समय थमा तो ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) ने विद्वानों की शिक्षा का भारी वज़न अपने कन्धों पर लिया, यह इस्लामी संस्थान की स्थापना से हुआ, (अहलेबैत (अ:स) का संस्थान)! जानकारी का मुख्य स्रोत इमाम अली (अ:स) द्वारा छोड़ा हुआ ज्ञान का भण्डार था! और बाद में आने वाले इमामों (अ:स) द्वारा संस्थान का विस्तार हुआ.

ज्ञान के भण्डार में निम्नलिखित शामिल थे : ज्ञान  का भण्डार Zainul Abideen ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) 1. क्रमबध क़ुरान का जमा 2. तफ़सीर (मुस'हफ़ फ़ातिमा) 3. हदीस  (सहीफ़ा-ए-अली) 4. अहकाम 5. अल-जफर उजला जफर : पैग़म्बर और शुरुआती समय लाल जफर : इस्लाम में युद्ध के नियम अली (अ:स) के लेख_____समय में: अबू बकर, उमर, और उस्मान  की ख़िलाफत में : ज्ञान के भण्डार में निम्नलिखित शामिल थे :

ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen इमामत इमामत चुनाव या बातचीत के अधीन नहीं है, यह एक पद है (एक निर्देश) जो अल्लाह देता है. ईमाम (अ:स) मासूम होता है, अर्थात अल्लाह उसकी निम्नलिखित बातों से रक्षा करता है: अ) धार्मिक गलतियां, ब) गुनाह, और स) भूल जाना.

कर्बला क़ो अपने ध्यान में रखें - I ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen कर्बला क़ो अपने ध्यान में रखें - I ईमाम ज़ैनुल (अ:स) आबेदीन ने लोगों से कर्बला जाने का आग्रह किया! इस प्रकार लोगों ने इस्लामी सिद्धांतों में अपने संकल्प की पुष्टि की, जिसके लिये ईमाम हुसैन  (अ:स) खड़े हुए थे!.  उनहोंने मुसलमानों क़ो हर साल कर्बला की याद मनाने क़ो प्रोत्साहित किया ईस प्रकार साल के समय पर  निजी घरों में गोपनीय तरीकों से मजलिसों का सिलसिला शुरू हुआ वोह हर साल अल-हुसैन (अ:स) की क़ब्र पर जाते थे  वोह कर्बला किसी सूचना दिए बगैर जाते थे, कसार किसी क़ो पता भी नहीं होता था की ईमाम आये हैं. .

कर्बला क़ो अपने ध्यान में रखें - II ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen कर्बला क़ो अपने ध्यान में रखें - II उनहोंने पाक मिट्टी पर सजदा करने की सलाह दी, उन्होंनेने यह सलाह इसलिए दी की जब इंसान अपने नमाज़ की चरम सीमा पर होता है (सजदे में), वो ईस्लामिक सिद्धांत के अनुसार हो, जिसके लिये ईमाम हुसैन (अ:स) ने अपनी जाँ दी और सही इस्लाम की पहचान बताई. उन्होंनेने एल लोगो का इस्तेमाल किया :  ईमाम हुसैन (अ:स) के क़ातिल हमेशा नापाक और बे'बुन्याद रहे. यह लोगो काफ़ी मशहूर हुआ

ज़ोर इमामत क़ो हमेशा समझाया और ईस पर ज़ोर दिया, और ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen इमामत क़ो हमेशा समझाया और ईस पर ज़ोर दिया, और इस्माह (जो आयत ततहीर में प्रमाणित है) पर हमेशा ज़ोर दिया गया (पवित्र क़ुरान,  सुराः 33: आयत 33) इस्लाम में अहलेबैत की अनोखी और केंद्रीय भूमिका क़ो अक्सर समझाया था. लगातार उच्च गुणवत्ता वाले विद्वानों का उत्पादन, ईस्लामिक संस्थानों द्वारा, जो दूसरों क़ो इस्लाम के बारे में बताने वाले थे, ईमाम हुसैन (अ:स) के मकसद और सिद्धांतों क़ो दुन्या में फैलाना, जिसके लिये ईमाम (अ:स) ने जान दी और इसी के साथ बनी उमय्या द्वारा किये गया अपमानों क़ो उजागर करना

संस्थान ने 160 से ज़्यादा विद्वान पैदा किये ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen संस्थान  ने 160 से ज़्यादा विद्वान पैदा किये

प्रसिद्ध छात्र ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen अल-बाक़र (अ:स) और उनके भाई ज़ैद ने भी हमेशा प्रवचन में भाग लिये, प्रसिद्ध छात्र थे: हसन अल-बसरी अल-समाली अल-ज़ुहरी इब्न तावूस, और बहुत सारे दुसरे विद्वान जो ज्ञानी और वैज्ञानिक हुए

चरित्र ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) बहुत क्षमा करने वाले और उदार थे. Zainul Abideen चरित्र ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) बहुत क्षमा करने वाले और उदार थे. रमज़ान में अपने गुलामों द्वारा किये गए अपराध क़ो नोट करते थे, फिर उसे एहसास दिलाते और समझाते थे और फिर उसे आज़ाद कर देते थे! वो अपनी माली हैसियत (दुनयावी) के मुताबिक़ जितने गुलाम मुमकिन होते थे उसे खरीद लेते थे, फिर उसे पढ़ाते थे और आज़ाद कर देते थे चूँकि वो उम्मत के ईमाम थे वो समाज में प्रतिष्ठित थे

ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen चरित्र ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) क़ो गरीबों और जरूरतमंदों के लिए सहानुभूति थी वह आटे की थैलियों को गरीबों  में वितरित  करने ले जाया करते थे रमज़ान  में वो रोज़ाना एक भेड़ क़ो पक्वा कर गरीबों में बांटा करते थे उनकी आवाज़ बहुत सुरीली थी, लोग उन्हें क़ुरान पढ़ता हुआ सुनकर मुग्ध हो जाते थे ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) ने कभी भी अपना कपड़ा एक मौसम से ज़्यादा नहीं पहना, उसके बाद वो उसे गरीबों में दे देते थे आर्थिक रूप से वह कई जरूरतमंद लोगों की मदद करते थे

दुआ का नमूना : शैतान से बचने की प्रार्थना Zainul Abideen ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) दुआ का नमूना : शैतान से बचने की प्रार्थना या अल्लाह, मै तुझ से ईन बातों से बचने की प्रार्थना करता हूँ :       · लालच की चरम सीमाओं से,       · गुस्से में जल्दबाजी करने से,       · हसद और जलन के बढ़ने से,       · धैर्य खोने से,       · संतुष्टि में कमी होने से,       · नैतिकता की भ्रष्टता से,       · लालसा के आगे झुक जाने से,       · उत्साह के भोग से,       · ख्वाहिशों के आगे झुक जाने से, और      · सत्य क़ो नकारने से.....   

ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen अधिकारों और कर्तव्यों के पत्र ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) ने बुनियादी अधिकारों चित्रित किया, जो शरियाह से हैं! अल्लाह का अधिकार मनुष्य पर  - विशेषाधिकार की एक विस्तृत रेंज को कवर किया गया है. शरीर और आत्मा का अधिकार, परिवार के सास्यों का अधिकार, उनके अधिकार जो निर्भर हैं और जो बेहतर हैं, दोस्तों और पड़ोसियों के अधिकार (जिनमें सभी धर्म सम्मिलित है). 

अधिकारों और कर्तव्यों के पत्र : पत्नी (बीवी) के अधिकार : ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen अधिकारों और कर्तव्यों के पत्र : पत्नी (बीवी) के अधिकार : एक पत्नी का अधिकार है की आप जाने की अल्लाह ने उसे आप के लिये आराम और शान्ति के लिये बनाया है! एक ऐसा दोस्त जो आपको गुनाहों से बचाए!. और इसी तरह, यह आप दोनों पर लाज़िम है की आप अपने जीवन साथी के होने पर, अल्लाह का शुक्रिया  अदा करें, जो आप पर अल्लाह की मेहरबानी है, आप क़ो (पत्नी का) आभार व्यक्त करना है : ·  इसकी इज़्ज़त करके, ·  इससे शालीनता और दयालुपूर्वक  पेश आकर, और ·  आपका हक़ (पत्नी पर)  आपके पसंद ना-पसंद पर आप पर उस समय तक अन्त होता है, जब तक आप किसी गुनाह में शामिल न करें, और आप की आज्ञा उसे माननी चाहिए! अर्थात, उसे प्यार और साथी बन्ने का अधिकार है, और सही बातों का (गुनाह से बचने का)  अंतिम ठिकाना है जहां प्राकृतिक इच्छाओं की पूर्ती हो सकती है! और यह एक महान कर्तव्य है!

ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen ज़ैनुल आबेदीन की शहादत ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) की 57 साल में ह्त्या, ज़हर से. अत्यधिक सजदे के कारण उनके पेशानी के चमड़े पर बड़ा घट्टा रातों में पीठ पर आटे की बोरियां उठा कर गरीबों में बंटवाने के कारण उनकी पीठ का चमड़ा मोटा हो गया था बहुत अधिक नमाज़ पढ़ने के कारण उनकी कमर झुक गयी थी और चेहरा पीला पड़ गया था बहुत  सख्त अनुभव मिला - चाहे कर्बला हो या राजनैतिक समय हो या दुसरे कारण हों उनपर बहुत कठिन जिम्मेदारियां थीं - मानसिक और शारीरिक जो उनके स्वास्थ पर भारी पड़ी

दफ़न ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) क़ो बक़ी में दफ़नाया गया Zainul Abideen दफ़न ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) क़ो बक़ी में दफ़नाया गया वो और दुसरे सभी जानते थे की बनी उमय्या की हुकूमत कहीं और दफ़न नहीं होने देगी समय के साथ, एक रौज़ा बनाया गया ताकि लोग ज़्यारत के लिये जा सकें और नमाज़ या दुआ पढ़ सकें वहाँ के शासक द्वारा 1925 में रौज़ा क़ो ध्वस्त कर दिया गया

जन्नत-उल-बक़ी की तस्वीर 1925 ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen जन्नत-उल-बक़ी की तस्वीर 1925 अल-बक़ी नष्ट होने के बाद अल-बक़ी 1925 से पहले

ज़्यादा विस्तार में जानकारी के लिये जाएँ: ज़ैनुल आबेदीन (अ:स) Zainul Abideen ज़्यादा विस्तार में जानकारी के लिये जाएँ: हिंदी में :   www.islaminhindi.org http://hindi.duas.org अंग्रेजी में www.duas.org    http://Islamicbooks.info उर्दू में www.islaminurdu.com http://urdu.duas.org